Kabhi Kabhi Khud ke Sath....!!

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कुछ नहीं हैं ...
कुछ नहीं चल रहा ....
यूँही बैठ लेता हूँ अकेला ....कभी कभी खुद के साथ .....!!


बहुत से सवाल होते हैं खुद के पास....
और वही से जवाब भी आते हैं खुद से....
बस बैठ जाता हूँ अकेला खुद के साथ....!!


शायद अलग हूँ, इस दुनिया से...
या फिर हूँ सबके जैसा....
सोच लेता हूँ कभी कभी खुद के साथ ...!!

कभी फसा हुआ महसूस करता हूँ...
कभी कभी आज़ाद सा लगता हैं...
यही पहेली मैं फस जाता हूँ खुद के साथ ..!!

शायद नहीं पता हैं मुझे की मैं क्यों आया हूँ....
पर कुछ न कुछ तो अच्छा कर ही जाऊंगा खुद के साथ ...!!

शायद कुछ ज्यादा ही चाहता हूँ खुद के साथ...!!
नहीं मिलता तो बेचैन हो जाता हूँ खुद के साथ ...!!

बस खुद से दूर न हो जाऊ ....
इसी डर से खामोश हो जाता हूँ खुद के साथ ...!!

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