" तारीके बदलती रहे पर प्यार बढता रहेगा "


सफ़र था हैं और चलता रहेगा...
पर मेरा साथ हमेशा रहेगा.....!!

आयेगे कुछ दिन अच्छे और बुरे भी ...
साथ हमारा सब सहता रहेगा...!!

हैं दिल में आपकी वो अहमियत....
ये अहमियत का आलम बढता रहेगा...!!

ख़ामोशी को दूरियां मत समझ बेठना....
नजदीकियों का दौर बढता रहेगा....!!

यहाँ बात दिल से दिल की हैं साहब....
तारिक बदलती रहे पर प्यार का कारवा बढता रहेगा.....!!
बढता रहेगा...!!



What is SUCCESS ?


Success is......
Share your experiences to other, who needs you.

Listen your heart not your mind.

Success is not to be earn money,invest properties,cars and all.


SUCCESS is..." जब आप कुछ ऐसा कर जाओ के हर चीस गवाने के बाद भी हस्ते हस्ते मर जाओ ...!!!"

"THAT IS SUCCESS MY DEAR......!!!!"



how behave like NORMAL ?


if you are failure in business and other...

WHY BEHAVE NORMAL ?
i mean to say that what is the process which one give us normal things.

So,i told you a solution-----

1--Listen a particular inspirational songs regularly.

2--and think in b/w , a situation to achieve all that which one you really want. your all desires completed in life and you just enjoying yourself.

3--and also imagine your ultimate goal, and you feel it, it is complete and you enjoying the situation.


these all things maintain you normal
and
believe me if you believe it ....definitely you achieve it...!!!


" तुमने किया ही क्या हैं ...? "


बहुत अजीब लगता होगा...जब कोई किसी से कहता हैं...
के तुमने किया ही क्या हैं ....!!

सारी जिमेदारी पूरी होने के बाद कहते हो....
के तुमने किया ही क्या हैं.....!!

माँ बाप के क़र्ज़ को चुकाना तो दूर और कह देना...
के तुमने किया ही क्या हैं....!!

दिल तो दुखता होगा जब ये सुनते होगे...
के तुमने किया ही क्या हैं...!!

एक सांस में आपकी ज़िन्दगी उनके सामने आजाती होगी ये सुनके....
के तुमने किया ही क्या हैं...!!

एक सवाल तुम्हारा जो तुम्हारे बच्चे भी पूछेंगे कभी तुमसे...
के तुमने किया ही क्या हैं...!!

किया हुआ दिख जाता तो ये शब्द ही नहीं आते....!
किया हुआ महसूस हो जाता तो ये शब्द ही नहीं आते....!

क़र्ज़ चुकाना तो दूर ऐ दोस्त तुम तो कह गए....
के तुमने किया ही क्या हैं...!!

इन शब्दों को सुन ने के बाद जाने कितनी बार मर-मर के मुस्कुराते खड़े हुए हैं वो हैं माँ बाप...!

इन शब्दों को सुनने के बाद तुम्हारे प्यार में कमी न करे वो हैं माँ बाप.....!

मर के मुस्कुराते खड़े होना और परवाह करना समझ आ जाता तो कभी नहीं कहते...
के तुमने किया ही क्या हैं...!!


" काम या भीख ? " एक सवाल


मित्रो आज के युग में हम रोज़ किसी न किसी ऐसी जगह पे होते हैं जहाँ पे हमे कुछ लोग साधारण से सामान बेचते या भीख मांगते नज़र आते हैं | जो लोग अपंग हैं और सामान बेचते हैं तो मेरे दोस्त भले ही आपको उस सामान की जरुरत नही हो फिर भी ले लिया करो ये सोचके के उस आदमी ने भीख मांगने से काम करना जरुरी समझा, ये एक बहुत अच्छी सोच हैं| दोस्तों ये इंसान घर पे बेठ सकता था या फिर किसी के आगे हाथ फेला सकता था पर इस इंसान ने ऐसा न करके काम करना स्वीकार किया,
दोस्तों ये सिर्फ एक कहानी नही एक सन्देश हैं उन लोगो के लिए जो हिम्मत हारने के बाद अपनी उमीदो को छोड़ दिया करते हैं,और दूसरी और हम देखते हैं के कई लोग ऐसे हैं जो दूसरो के आगे हाथ फेला देते हैं जो अक्सर हमे चौराहों पे देखने को मिलते हैं,दोस्तों में ये नही कहता की हमे इनकी मदद नही करनी चाहिए अगर आपको मदद ही करनी हैं तो इनको कुछ खिला दो,मगर इनको पैसे देके इनको काम से दूर,महनत से दूर न करो, में उन लोगो की यहाँ बात कर रहा हूँ जो शरीर से स्वस्थ होने के बावजूद ऐसा करते हैं| कृपया इस मेसेज को इतना शेयर करे, ताकि हर इंसान की सोच बदले और वो अन्धविश्वास की बजाये विश्वास से लोगो का जीवन सुधार सके|

" क्यों मनाऊ ये दीवाली "


हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरी बहन बिना शादी के घर पर बेठी हो....!!

हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरा घर खुद अधुरा सा हो....!!

हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरा काम भी खामोश हो...!!

दिवाली का मज़ा तब ही आयेगा अब....
जब मेरी बहन के हाथों में मेहँदी आयेगी....!!

दिवाली का मज़ा तो अब जब ही आयेगा....
जब मेरा आशियाना तैयार हो जायेगा....!!

और हाँ दिवाली का मज़ा और भी ज्यादा आयेगा....
जब मेरे काम में लक्ष्मी का तूफ़ान आयेगा.....!!

" पर "

इस दिवाली में, मैं फिर से खामोश सा हूँ....
इस दिवाली पे में फिर से बेबस सा हूँ.....
इस दिवाली पे में फिर से अधुरा सा हूँ....
इस दिवाली पे में सबके साथ होते हुए भी अकेला सा हूँ...

हो अगर इस दीवाली मेरी एक ख्वाइश पूरी...
तो मांगलूँगा दुआ मेरी बहिन को दुल्हन बने देखने की....!!

"और "

शायद अगली दिवाली में, मैं इस बहाने से ही बना लूँगा...
एक ही सही पर मेरी सबसे बड़ी ख्वाइश पूरी की तूने मेरी माँ...!!

" हैप्पी दिवाली "


जीवन को कैसे तराशे


दिल दहल जाता हैं जब भी देखता हूँ इस दौर के इंसानों को, के क्या होता जा रहा हैं आज के लोगो को क्यों ये नही समझ पा रहे हैं की ये नेचर जो हैं अगर इसको हमने बैलेंस में नही रखा तो आने वाली पीढ़ी को हम क्या देके जायेंगे| जिस तरीके से इंसान के अंदर जो भूख होती थी वो बदल रही हैं| पहले भूख थी परिवार में रहने की , माँ का प्यार पिताजी का भय और कुछ कर गुजरने की,बड़ो के प्यार में बिगड़ने की, दादा दादी के लाडले होने की, छोटे से खिलोने के साथ खेलने की,खेल भी अजीब से होते थे जो बुजुर्गो और परिवार से जुड़े होते थे जैसे घर घर खेलना कोई माँ तो कोई पापा बनते थे कुछ बच्चे बन जाया करते थे, डॉक्टर डॉक्टर खेलते थे ,छुपते और पकड़ते थे, हर चीस का अपना एक स्वाद होता था, सन्डे को सुबह से दिन की फ़िल्म का अपना ही मजा होता था,ऐसे दौर चला करते थे |


समय बदला लेकिन लोगो ने तो जीवन ही बदल डाला, क्यों आज सारी सुविधा होने पे भी कमी सी लगती हैं , क्यों आज ताज़ा सांस लेने के लिए लोग हिल-स्टेशन पे जाया करते हैं, जंगल ख़त्म हो रहे और जंगली जानवर पिंजरों में कैद हो रहे हैं और लोगो का आकर्षण का केंद्र बन के बिज़नस कर रहे हैं, शर्म सी आती हैं कुछ इस तरह से, के जो जंगली जानवर जंगलों के राजा हुआ करते थे आज वो कैद मैं रहकर सबका दिल बहलाया करते हैं, क्यों जिंदगी को कैद करने की एक अनोखी साजिश हमारे जहम में बेठ चुकी हैं , चाहे वो इंसान हो या जानवर | क्यों हम सबको अपने इशारो पे चलाने को बेबस हो गए हैं |

हमे पेड़ पौधे तो चाहिए लेकिन उनसे होने वाले कचरे के लिए पडोसी से लडाई कर लेनी हैं, और अंत में पेड़ को कटवा दिया जाता हैं, और अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए पेड़ की छाया देखते हैं, अरे सोचो, वो पेड़ आपको बिना किसी स्वार्थ के कितना कुछ देता रहता हैं, ऑक्सीजन , आपके और पशुओ के लिए छाया, पानी और भी बहुत कुछ ....
हम सबकुछ जानके भी बेठे रहते हैं और ग्लोबल वार्मिंग का रोना रोते रहते हैं जबकि जीमेदार हम खुद हैं...
बचा लो खुद को सवाल करो खुद से ...खुद से शुरुवात करो....क्योकि आप से ही नये युग की शुरुवात लिखी हैं..
किसी के लिए न बदले खुद के लिए करे...अच्छा लगेगा|

और अगर फिर भी समझ नहीं आये तो एक बार शांति से अपने और अपने आस पास के वातावरण को देखना और खुद से पूछना......
क्या इसी जीवन की कामना की थी हमने ?
क्या यही लाइफ हैं हमारी ?
क्या खुश हो इस ज़िन्दगी से ?
एक सवाल जरुर करो खुद से ?

देखो जरा क्या जवाब आता हैं |



भगवान् एक भय और आस्था


लाइफ क्या हैं ? मैं कोन हूँ ? मैं इस दुनिया मैं क्यों हूँ ? क्या मुझे किसी खास उद्देश्य से यहाँ भेजा गया हैं | और अगर भेजा हैं तो किसने भेजा हैं | और वो कोन हैं जो मुझे और इस पूरी नेचर को कण्ट्रोल कर रहा हैं | मेरा क्या उद्देश्य हैं मेरे जीवन मैं , ऐसे कई सवाल हैं जो जहम मैं कभी आजाते हैं और उसके बाद शुरू होता हैं ज़िन्दगी को समझने का एक अनहोना सच जिसे लोग न तो सोच पाते हैं और न ही समझ पाते हैं |

इस दुनिया मैं जिसे भगवान् कहा गया हैं | या ये कहे के जो एक पॉवर हैं जिसने सभी को कण्ट्रोल कर रखा हैं चाहे वो इंसान हो जानवर हो या नेचर | उसको जिस तरीके से लोगो ने उसे समझा हैं वो देख के बहुत अजीब लगता हैं | सबसे बड़ी सच्चाई जो हैं वो ये हैं की “हम अलग अलग रूप मैं एक ही भगवान् की पूजा करते हैं ” |

सबसे बड़ा सवाल यहाँ ये भी हैं के क्या भगवान हैं या फिर ये हमारे मन का सिर्फ एक भय हैं या फिर लोगो के द्वारा बनाया गया एक अन्द्विश्वास | हम अलग अलग भगवन को मानते हैं और उनका हमने रूप भी दिया हुआ हैं | क्या कभी ये सोचा हैं की भगवान् का रूप किसने देखा और ऐसा ही क्यों देखा , लगाओ एक प्रश्न यहाँ पे फिर | क्या भगवान् ऐसा ही हैं जैसा हम देख रहे हैं या फिर जैसा हम मान रहे हैं अगर हाँ तो दुसरे लोग जो अलग प्रारूप को भगवान् मान रहे हैं वो भगवान् हैं | किसका भगवान् ओरिग्नल हैं किसका नहीं बस इसी बात की जंग छिड़ी हुए हैं जो की बहुत ही बकवास मुद्दा हैं |

जो भी जिस भी रूप मैं उसे मानता हैं वो रूप जो उसे दीखता हैं जिसे वो देख पा रहा हैं तो क्या वो ही भगवान् हैं या एक रूप हैं जिसे हमने ही बना रखा हैं | वो भगवान् नहीं हैं वो तो सिर्फ एक पत्थर हैं भगवान् हमारे अंदर हैं जो उस पत्थर के रूप को भगवान् मान रहा हैं | बात कडवी तो हैं मगर सोचो तो सही लग सकती हैं क्योकि भगवान् हमारे मन मैं शुरू से रख दिया जाता हैं | जिससे अब कुछ लोग तो क्या सभी लोग डरने लगे हैं | जिसे अन्द्विश्वास का नाम देना गलत नहीं होगा | अगर कोई पॉवर हैं जिसे आप भगवान् कह रहे हो तो सोचो के जिसने आपको यहाँ भेजा हैं उसका क्या उद्देश्य हैं आपको यहाँ भेजने का , सोचा हैं कभी ये | और जो आप कर रहे हो क्या ये वही काम हैं जिसके लिए आपके भगवान् ने आपको भेजा हैं |
अब यहाँ एक प्रश्न आता हैं जो बहुत महत्वपूर्ण हैं.......
इन सब बातों को सोचने और समझने का सही वक़्त क्या हैं ?

इसका जवाब बहुत साधारण सा हैं समझ में आसके तो देखिएगा,
जब तक हम आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होगे तब तक हम इसका जवाब नहीं पा सकते.....ये एक सच्चाई हैं....

हम भगवान् को तब तक नहीं समझ सकते जब तक की हम आर्थिक रूप से सक्षम नही होगे...

इसलिए पहला कर्म हैं काम जो आपको संतुष्ट करे....

उसके बाद ये प्रश्न, जवाब आपके अन्दर से आयेगा.....




" सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए..."


यारो की यारियां थी..दिल में कुछ नहीं रहा..जो कहना था कह गए..
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

स्कूल टाइम के शौक भी क्या शोक थे....
खाने से शुरू हुए और खाने पे ही खत्म हो गए..
पर आज पीने से शुरू होके पीने पे खत्म कर गए...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

यारो के न मिलने पे कमी सी लगा करती थी उन दिनों...
अब फुर्सत के दिन तबाह हो गए ...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

घंटो बिता दिया करते थे उन बेकार की हँसी मज़ाको के साथ...
अब घंटे तो मिनटों के खेल हो गए...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

क्या चाट क्या पताशे थे...
फ़ास्ट फ़ूड के चटकारे थे....
थी समोसे खाने की लड़ाई ...
पर ये सब खाने अब चखना हो गए....
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

मिला करते थे सभी को साथ लेके एक टाइम पे...
आज टाइम पे वो साथ हैं जो पिया करते हैं...
बाकि न पिने वाले जाने कहाँ खो गए...
सच में मेरे प्यारे दोस्त बड़े हो गए...!!

होती हैं कमी ज़िन्दगी में उनकी मुझे...
काश ये सब उस पीने से नाराज़ हो जाये...
और मेरी दोस्ती पे फिर से फ़िदा हो जाये...
फिर से मिनट घंटो मैं बदल चले...
और हम सब साथ हो चले...
फिर से वही सब दिन आगये....

और अब....
होता हैं उन पे अभिमान...
जिन पे में देता हूँ अपनी जान....
थे अपने ही दोस्त जो वापस आगये....
हाँ सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

" खामोश हूँ......"


मैं खामोश हूँ इसका मतलब ये नहीं....की मुझे एहसास नहीं...!!
मैं खामोश हूँ इसका मतलब ये नहीं.....मुझे प्यार नहीं.....!!
मैं खामोश हूँ इसका मतलब ये नहीं....की मैं आपके जज्बातों की कदर नहीं करता...!!
मैं खामोश हूँ इसका मतलब ये तो बिलकुल नहीं...की मुझे आपकी फ़िक्र नहीं है ...!!
खामोशी के लफ्जों मैं तुम हो.....!!
ख़ामोशी के एहसास मैं तुम हो....!!
ख़ामोशी के हर बात मैं तुम हो....!!
शायद यही वो भाषा हैं....जो दिल से दिल तक जाती हैं....!!
ख़ामोशी ....हाँ बस यही ख़ामोशी.......!!!

" जब तुम न थी "

था अधुरा सा जब तुम न थी.....
हाँ हर पल सोचता था, तुम्हारे जैसा....
जब तुम न थी....!!

एक कमी सी थी , एक जरुरत सी थी....
ज़िन्दगी के उन पलो मैं, जब तुम न थी..!!

सोचता था तुम्हारे जैसे इंसान को....
सोचता था शायद की, कुछ ज्यादा ही सोच रहा हूँ...
जब तुम न थी....!!

क्या कोई मुझे समझ सकेगा....
ऐसा न हो जाये के मुझसे मुझे खोने के बाद मुझे कोई अपनाये....
इसी डर से सहम जाता था ....जब तुम न थी...!!

हाँ था अकेला इस ज़िन्दगी मैं....
तनहा सा...बेबस सा....हाँ कुछ कमी सी तो थी...जब तुम न थी...!!

रिश्ते को खोने का डर...
या किसी को सोचके खुद को पाने की ख़ुशी...
इन्ही सब बातों से अनजान था...जब तुम न थी...!!

अब जबकि मुझे मेरा साथी मिल गया हैं....
वैसा ही जैसा मैंने सोचा था...
थी कल की बात...
जिन बातों को सोच कर घबरा दिया करता था....
आज इस एहसास के साथ खुश हूँ...
के हुई हैं मेरी हर ख़ुशी पूरी तुम्हारे साथ....
और सोचना मैंने कर दिया हैं बंद ...
और जीने लगा हूँ...
बस ख़तम हो गया हैं वो सफ़र...
जब मैं कुछ सोचा करता था.....
जब तुम न थी......
जब तुम न थी....
जब तुम न थी.....

Kabhi Kabhi Khud ke Sath....!!

+

कुछ नहीं हैं ...
कुछ नहीं चल रहा ....
यूँही बैठ लेता हूँ अकेला ....कभी कभी खुद के साथ .....!!


बहुत से सवाल होते हैं खुद के पास....
और वही से जवाब भी आते हैं खुद से....
बस बैठ जाता हूँ अकेला खुद के साथ....!!


शायद अलग हूँ, इस दुनिया से...
या फिर हूँ सबके जैसा....
सोच लेता हूँ कभी कभी खुद के साथ ...!!

कभी फसा हुआ महसूस करता हूँ...
कभी कभी आज़ाद सा लगता हैं...
यही पहेली मैं फस जाता हूँ खुद के साथ ..!!

शायद नहीं पता हैं मुझे की मैं क्यों आया हूँ....
पर कुछ न कुछ तो अच्छा कर ही जाऊंगा खुद के साथ ...!!

शायद कुछ ज्यादा ही चाहता हूँ खुद के साथ...!!
नहीं मिलता तो बेचैन हो जाता हूँ खुद के साथ ...!!

बस खुद से दूर न हो जाऊ ....
इसी डर से खामोश हो जाता हूँ खुद के साथ ...!!

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