" क्यों मनाऊ ये दीवाली "


हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरी बहन बिना शादी के घर पर बेठी हो....!!

हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरा घर खुद अधुरा सा हो....!!

हाँ क्यों मनाऊ में ये दिवाली.....
जबकि मेरा काम भी खामोश हो...!!

दिवाली का मज़ा तब ही आयेगा अब....
जब मेरी बहन के हाथों में मेहँदी आयेगी....!!

दिवाली का मज़ा तो अब जब ही आयेगा....
जब मेरा आशियाना तैयार हो जायेगा....!!

और हाँ दिवाली का मज़ा और भी ज्यादा आयेगा....
जब मेरे काम में लक्ष्मी का तूफ़ान आयेगा.....!!

" पर "

इस दिवाली में, मैं फिर से खामोश सा हूँ....
इस दिवाली पे में फिर से बेबस सा हूँ.....
इस दिवाली पे में फिर से अधुरा सा हूँ....
इस दिवाली पे में सबके साथ होते हुए भी अकेला सा हूँ...

हो अगर इस दीवाली मेरी एक ख्वाइश पूरी...
तो मांगलूँगा दुआ मेरी बहिन को दुल्हन बने देखने की....!!

"और "

शायद अगली दिवाली में, मैं इस बहाने से ही बना लूँगा...
एक ही सही पर मेरी सबसे बड़ी ख्वाइश पूरी की तूने मेरी माँ...!!

" हैप्पी दिवाली "


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