इस दुनिया मैं जिसे भगवान् कहा गया हैं | या ये कहे के जो एक पॉवर हैं जिसने सभी को कण्ट्रोल कर रखा हैं चाहे वो इंसान हो जानवर हो या नेचर | उसको जिस तरीके से लोगो ने उसे समझा हैं वो देख के बहुत अजीब लगता हैं | सबसे बड़ी सच्चाई जो हैं वो ये हैं की “हम अलग अलग रूप मैं एक ही भगवान् की पूजा करते हैं ” |
सबसे बड़ा सवाल यहाँ ये भी हैं के क्या भगवान हैं या फिर ये हमारे मन का सिर्फ एक भय हैं या फिर लोगो के द्वारा बनाया गया एक अन्द्विश्वास | हम अलग अलग भगवन को मानते हैं और उनका हमने रूप भी दिया हुआ हैं | क्या कभी ये सोचा हैं की भगवान् का रूप किसने देखा और ऐसा ही क्यों देखा , लगाओ एक प्रश्न यहाँ पे फिर | क्या भगवान् ऐसा ही हैं जैसा हम देख रहे हैं या फिर जैसा हम मान रहे हैं अगर हाँ तो दुसरे लोग जो अलग प्रारूप को भगवान् मान रहे हैं वो भगवान् हैं | किसका भगवान् ओरिग्नल हैं किसका नहीं बस इसी बात की जंग छिड़ी हुए हैं जो की बहुत ही बकवास मुद्दा हैं |
जो भी जिस भी रूप मैं उसे मानता हैं वो रूप जो उसे दीखता हैं जिसे वो देख पा रहा हैं तो क्या वो ही भगवान् हैं या एक रूप हैं जिसे हमने ही बना रखा हैं | वो भगवान् नहीं हैं वो तो सिर्फ एक पत्थर हैं भगवान् हमारे अंदर हैं जो उस पत्थर के रूप को भगवान् मान रहा हैं | बात कडवी तो हैं मगर सोचो तो सही लग सकती हैं क्योकि भगवान् हमारे मन मैं शुरू से रख दिया जाता हैं | जिससे अब कुछ लोग तो क्या सभी लोग डरने लगे हैं | जिसे अन्द्विश्वास का नाम देना गलत नहीं होगा | अगर कोई पॉवर हैं जिसे आप भगवान् कह रहे हो तो सोचो के जिसने आपको यहाँ भेजा हैं उसका क्या उद्देश्य हैं आपको यहाँ भेजने का , सोचा हैं कभी ये | और जो आप कर रहे हो क्या ये वही काम हैं जिसके लिए आपके भगवान् ने आपको भेजा हैं |
अब यहाँ एक प्रश्न आता हैं जो बहुत महत्वपूर्ण हैं.......
इन सब बातों को सोचने और समझने का सही वक़्त क्या हैं ?
इसका जवाब बहुत साधारण सा हैं समझ में आसके तो देखिएगा,
जब तक हम आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होगे तब तक हम इसका जवाब नहीं पा सकते.....ये एक सच्चाई हैं....
हम भगवान् को तब तक नहीं समझ सकते जब तक की हम आर्थिक रूप से सक्षम नही होगे...
इसलिए पहला कर्म हैं काम जो आपको संतुष्ट करे....
उसके बाद ये प्रश्न, जवाब आपके अन्दर से आयेगा.....

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