" सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए..."


यारो की यारियां थी..दिल में कुछ नहीं रहा..जो कहना था कह गए..
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

स्कूल टाइम के शौक भी क्या शोक थे....
खाने से शुरू हुए और खाने पे ही खत्म हो गए..
पर आज पीने से शुरू होके पीने पे खत्म कर गए...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

यारो के न मिलने पे कमी सी लगा करती थी उन दिनों...
अब फुर्सत के दिन तबाह हो गए ...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

घंटो बिता दिया करते थे उन बेकार की हँसी मज़ाको के साथ...
अब घंटे तो मिनटों के खेल हो गए...
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

क्या चाट क्या पताशे थे...
फ़ास्ट फ़ूड के चटकारे थे....
थी समोसे खाने की लड़ाई ...
पर ये सब खाने अब चखना हो गए....
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

मिला करते थे सभी को साथ लेके एक टाइम पे...
आज टाइम पे वो साथ हैं जो पिया करते हैं...
बाकि न पिने वाले जाने कहाँ खो गए...
सच में मेरे प्यारे दोस्त बड़े हो गए...!!

होती हैं कमी ज़िन्दगी में उनकी मुझे...
काश ये सब उस पीने से नाराज़ हो जाये...
और मेरी दोस्ती पे फिर से फ़िदा हो जाये...
फिर से मिनट घंटो मैं बदल चले...
और हम सब साथ हो चले...
फिर से वही सब दिन आगये....

और अब....
होता हैं उन पे अभिमान...
जिन पे में देता हूँ अपनी जान....
थे अपने ही दोस्त जो वापस आगये....
हाँ सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!
सच में मेरे दोस्त बड़े हो गए...!!

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