इश्क हैं तो हैं....!!!

मिलना बिछड़ना , रूठना झगड़ना ....
फिर बाद मैं मान भी जाना ....
इश्क हैं तो हैं.......i


दूरियों को महसूस करना ......
महसूस करके थोडा मुस्कुराना .....
मुस्कुराके दिल को समझाना....
इश्क हैं तो हैं.....ii


छेड़ना ,डराना और पल में मनाना .....
फिर मुस्कुराके इतराना.....
इतराके खुद को सवारना....
इश्क हैं तो हैं.....iii


बड़े होने पे भी बच्चे सा होना.....
बच्चे बनने पे अपनी ज़िद पूरी करना .....
ज़िद पूरी होने पे इठलाना ....
इश्क हैं तो हैं......iv


रूठना , झगड़ना , झगड़ के फिर मान जाना.....
मान के खुद झुक जाना.....
ओर सामने वाले पे एहसान जताना....
इश्क हैं तो हैं......v


ये इश्क ही हैं , जो बताया न जाये....
ये इश्क ही हैं , जो जताया न जाये.....
ये इश्क ही हैं , जो भूलाया न जाये ....
अरे हाँ बाबा ....
इश्क हैं तो हैं न .....!!!vi


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